IPC धारा 34 (Section 34 IPC in Hindi)

1. धारा 34 की परिभाषा (Definition of IPC 34)
धारा 34 भारतीय दंड संहिता (IPC 1860) में “Common Intention – साझा आशय” के सिद्धांत पर आधारित है।
जब दो या दो से अधिक व्यक्ति एक समान उद्देश्य से कोई अपराध करते हैं, तो उन सभी को अपराध का दोषी माना जाएगा, चाहे अपराध में उनकी भूमिका कितनी भी बड़ी या छोटी क्यों न हो।
2. समान आशय (Common Intention) क्या है?
समान आशय (Common Intention) का अर्थ है –
- सभी व्यक्तियों ने अपराध करने से पहले एक समान योजना बनाई हो।
- सभी का इरादा अपराध करने का ही हो।
- अपराध करते समय सभी ने आपस में सहयोग किया हो।
केवल मौजूद रहना पर्याप्त नहीं है। अभियोजन को यह साबित करना होगा कि आरोपी की मंशा (Intention) और भूमिका (Participation) दोनों अपराध में शामिल थीं।
3. धारा 34 का उद्देश्य (Objective of IPC 34)
- यह सुनिश्चित करना कि समूह अपराधों में कोई आरोपी बच न सके।
- यह रोकना कि अपराधी यह बहाना न बना सके कि उसकी भूमिका छोटी थी।
- कानून सभी सहभागियों को समान रूप से जिम्मेदार ठहराता है।
- न्यायिक व्यवस्था में समानता (Equality before Law) बनाए रखना।
4. समूह में अपराध (Crime in Group)
धारा 34 तब लागू होती है जब:
- अपराध दो या अधिक व्यक्तियों द्वारा किया गया हो।
- सभी का इरादा एक ही उद्देश्य से अपराध करना हो।
- अपराध का परिणाम समूहिक प्रयास का नतीजा हो।
उदाहरण:
- यदि चार लोग मिलकर हत्या की योजना बनाते हैं और हत्या को अंजाम देते हैं, तो सभी को हत्या का दोषी माना जाएगा।
- यदि तीन लोग मिलकर डकैती करते हैं, तो चाहे किसी एक ने केवल निगरानी रखी हो, उसे भी दोषी माना जाएगा।
5. साक्ष्य की आवश्यकता (Evidence Requirement)
अभियोजन (Prosecution) को निम्न बातें साबित करनी होती हैं:
- सभी आरोपी अपराध के समय मौजूद थे।
- उनका इरादा अपराध करने का ही था।
- उन्होंने समूह में मिलकर अपराध को अंजाम दिया।
केवल मौजूद रहना (Mere Presence) अपराध नहीं है। लेकिन यदि उपस्थिति के साथ मदद या सहयोग भी है, तो धारा 34 लागू होगी।
6. सजा (Punishment under IPC 34)
- धारा 34 स्वयं में कोई अलग सजा निर्धारित नहीं करती।
- सजा उस अपराध की होगी जो किया गया है।
- लेकिन धारा 34 के अंतर्गत सभी आरोपियों को समान सजा दी जाएगी।
उदाहरण:
- यदि हत्या (धारा 302 IPC) हुई है और धारा 34 लागू होती है, तो सभी आरोपियों को 302 IPC के तहत हत्या की सजा दी जाएगी।
7. सिद्धांत (Principle of IPC 34)
यह धारा “Joint Liability” (साझा उत्तरदायित्व) पर आधारित है।
- सिद्धांत यह है कि – “यदि कई लोग एक उद्देश्य से मिलकर अपराध करते हैं, तो हर व्यक्ति अपराध के लिए उतना ही जिम्मेदार है जितना कि जिसने अपराध को अंजाम दिया।”
8. धारा 34 के लागू होने की शर्तें (Conditions for IPC 34)
दो या अधिक व्यक्तियों की भागीदारी।
- समान उद्देश्य या साझा आशय।
- अपराध का परिणाम समूहिक कार्यवाही का होना।
- अपराध करते समय सभी का सहयोग या सहभागिता होना।
9. महत्वपूर्ण न्यायिक निर्णय (Important Case Laws on IPC 34)
- Barendra Kumar Ghosh vs King Emperor (1925)
– निर्णय: केवल ट्रिगर दबाने वाला व्यक्ति ही दोषी नहीं होगा, बल्कि सभी योजना बनाने वाले दोषी होंगे। - Pandurang vs State of Hyderabad (1955)
– निर्णय: केवल मौजूद रहना पर्याप्त नहीं, अभियोजन को साझा इरादा सिद्ध करना होगा। - Krishna Govind Patil vs State of Maharashtra (1963)
– निर्णय: समान इरादे का होना और अपराध में सक्रिय सहभागिता साबित होनी चाहिए।
10. निष्कर्ष (Conclusion)
IPC धारा 34 भारतीय न्याय प्रणाली का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।
यह धारा सुनिश्चित करती है कि समूह अपराधों में सभी व्यक्तियों को समान रूप से जिम्मेदार ठहराया जाए।
इससे अपराधियों को कानून के loopholes का फायदा उठाने से रोका जाता है।
11. FAQ – धारा 34 IPC से जुड़े प्रश्न
प्रश्न 1: धारा 34 IPC किस अपराध पर लागू होती है?
उत्तर: यह हर उस अपराध पर लागू होती है जो दो या अधिक व्यक्तियों द्वारा समान आशय से किया गया हो।
प्रश्न 2: क्या धारा 34 में केवल मौजूद रहना अपराध है?
उत्तर: नहीं, अभियोजन को यह सिद्ध करना होगा कि व्यक्ति का इरादा और सहयोग अपराध में शामिल था।
प्रश्न 3: धारा 34 में सजा क्या है?
उत्तर: धारा 34 अलग सजा निर्धारित नहीं करती। सजा वही होगी जो अपराध के लिए IPC में दी गई है, लेकिन सभी आरोपियों को समान रूप से दी जाएगी।